5.1.17

बाप ने बोरियां ढोकर बेटे को पहुंचाया गूगल तक, पढ़िए इनकी सफलता की कहानी

Son works in google Seattle father is still a labour by choice

26 साल के राम चंद्रा की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। अपनी मेहनत और लगन के दम पर आज उन्होंने अपनी किस्मत ही पलट दी। गरीबी में बचपन गुजारने के बाद राम ने कुछ ऐसा कर दिखाया है कि आज वो लोगों के लिए मिसाल बन गए हैं। 

राम राजस्थान के सोजत के रहने वाले हैं। उनके पिता ने रोजाना दिहाड़ी मजदूरी करके उन्हें पढ़ाया-लिखाया। राम के परिवार में उनके अलावा उनके माता-पिता, एक छोटा भाई और एक छोटी बहन है। राम के पिता ने पूरे परिवार को दिहाड़ी मजदूरी करके पाला है।

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राम ने सोजत से पढ़ाई पूरी करने के बाद कोटा में इंजीनियरिंग के लिए कोचिंग ली। राम बचपन से ही पढा़ई में अच्छे थे और स्कूल और कॉलेज के दौरान उन्हें स्कॉलरशिप भी मिली। साल 2009 में आईआईटी-रूड़की में उन्हें एडमिशन मिल गया और अपनी पहली नौकरी उन्हें गूगल इंडिया में मिली। राम गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। लेकिन गूगल तक पहुंचने का उनका सफर इतना भी आसान नहीं था। पढा़ई के दौरान कई लोगों ने उनकी मदद की। किसी ने उन्हें कपड़े दिए तो कुछ लोगों ने लैपटॉप खरीद कर दिया।

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राम आज गूगल के सीएटल, अमेरिका के ऑफिस में कार्यरत हैं। नौकरी लगने के बाद राम ने उन सभी लोगों का उधार भी चुका दिया जिनसे उनके पिता ने उनकी पढ़ाई के लिए उधार लिया था। लेकिन उनके पिता आज भी मजदूरी करते हैं। राम कहते हैं कि उन्होंने अपने पिता को मना किया लेकिन वह खाली नहीं बैठना चाहते। उनके पिता तेजाराम रोजाना मेंहदी की बोरियां ढोने का काम करते हैं और 100 से लेकर 400 रुपये तक कमा लेते हैं।

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राम कहते हैं कि वह एक दिन अपने देश लौटकर समाज-सेवा करना चाहते हैं। वह बस तब तक नौकरी करना चाहते हैं जब तक कि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हो जाती।

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